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ad27sh28
Member
# Posted: 12 Jul 2010 08:10
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भूली-बिसरी यादों की किरणों को सज़ा के रोयें हैं,
वो चेहसाथ तुम्हारा क्या छूटा था,हर दर्द से रिश्ता टूटा था,
ये आँसू खुशी के आँसू है,तुमको पा के रोयें हैं!
रा जब याद आया है,हम शमां जला के रोयें हैं!


ad27sh28
Member
# Posted: 12 Jul 2010 08:14
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अपनी ही मज़बूरी थी जो होंठ हमारे खुल ना सके,
जब भी माँगा खुदा से तुम्हे,बस हाथ उठा के रोयें हैं!

याद है अब तक वो शाम-ए-जुदाई,वो पलकें भी भींगी थी,
आज उन्हीं आँखों के ख्वाब सज़ा कर रोयें हैं!


ad27sh28
Member
# Posted: 12 Jul 2010 08:18
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ना तुझे छोड़ सकते हैं, तेरे हो भी नहीं सकतें,
ये कैसी बेबसी है की आज हम रो भी नहीं सकते.

ये कैसा दर्द है, पल-पल हमें तडपाये रखता है,
तुम्हारी याद आती है तो फिर सो भी नहीं सकते.

ad27sh28
Member
# Posted: 25 Jul 2010 22:28
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कभी कभी दिल उदास होता है ,
हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है !
छलती है मेरी भी आँखों से नमी ,
जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है !

ad27sh28
Member
# Posted: 25 Jul 2010 22:29
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उम्र की राह में रस्ते बदल जाते है ,
वक्त की अंधी में इन्सान बदल जाते है !
सोचते है तुमेह इतना याद न करे ,
लेकिन आँखे बंद करते ही इरादे बदल जाते है !!

ad27sh28
Member
# Posted: 25 Jul 2010 22:30
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मैंने दो मोतियों को अपनी आँखों में सम्हाल रखा था
आपकी अमानत है ये सोच के थाम रक्खा था
आपकी याद टीसने लगी तो लुढ़क गए
वर्ना मेरा इंतजाम तो पक्का था

ad27sh28
Member
# Posted: 25 Jul 2010 22:32
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रास्ता भूल गया या यहाँ मंज़िल है मेरी
कोई लाया है या ख़ुद आया हूँ मालूम नहीं
कहते हैं हुस्न कि नज़रें भी हसीं होती हैं
मैं भी कुछ लाया हूँ क्या लाया हूँ मालूम नहीं

ad27sh28
Member
# Posted: 25 Jul 2010 22:33
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ये दोस्ती चिराग है इसे जलाये रखना,
ये दोस्ती गुल है इसे खिलाये रखना,
हम रहे न रहे इस जहाँ में,
बस हमारी याद दिल में बसाये रखना.......!!

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 10:40
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आँखें चुराना तो अदाएं हैं उनकी
अपनी अदाओं से वो बेकरार करती है,
उन्ही आँखों में झांक कर देखो
शायद वो अब भी इकरार करती है !!!!!

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 10:42
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आँखे खोल के जगा दी हसरतें,
उसको भी खो दिया जिसको पाया था ख्वाब में ,
रोज हम उदास होते हैं और शाम गुजर जाती हैं,
आज शाम उदास होगी और हम गुजर जायेंगे |

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 10:44
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हम अंजुमन में रात बड़ी शान से गए,
ईमान चीज क्या थी ? कई जान से गए !
हाथ में दस्ती लिए कहते नकाब हो
चेहरा खुला हुवा था पहचान से गए

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 10:55
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वो अंजुमन नहीं था जहाँ शान से गए
वो जंगे मैदान था जहाँ जान से गए
हाथ में दस्ती लिए कहते नकाब हो
चेहरा खुला हुवा था पहचान से गए
रोशन हुए थे आप हां शमा के मानिंद
वाकई परवाने कल परेशान हो गए
देखा नहीं है आपने अपना खातूत्दान
लो जी हम उम्मीद ओ अरमान से गए
करता नहीं कोई अपने पे यूँ गुरुर
अच्छा किया कि आप खुद मान से गए

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 10:59
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचेनी को बस बIदल समझता है
मैं मुझसे दूर कैसा हूँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता हैं

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 11:00
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मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कविरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आंसू है
जो तू समझे तो मोती हैं जो ना समझे तो पानी है

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 11:05
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अपना गम हम भूल गए, तेरी वफ़ा भूल गए |
हम तो हर बात मुहब्बत के सिवाय भूल गए |
हम अकेले ही नहीं प्यार के दीवाने सनम |
आप भी नज़रें झुकाने की अदा भूल गए |
अब तो सोचा है की आँचल ही तेरा थामेंगे |
हाथ जब हमने उठाये तो दुआ भूल गए |
शुक्र समझो इसे या अपनी शिकायत समझो |
तुमने वो दर्द दिया हम तो दवा भूल गए

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 11:06
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मोहब्बत रोग है जाना,
अजब संजोग है जाना,
ये कैसा जोग है जाना,

बड़े बूढ़े बताते थे !
कई किस्से सुनाते थे !
मगर हम मानते कब थे ?!
ये सब कुछ जानते कब थे !
ये बातें ज़िक्र के काबिल !
भला पहचानते कब थे ?!

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 11:07
Reply 


माना के तख़्त पर बैठे !
हमें मालूम ही कब था ?!
माना कि तख़्त से ऊपर,
बहुत सारी बुलंदी पर !
कहीं परियों के झुरमुट में
तेरे पैरों कि पायल में !
तेरे छोटे से गाँव में !
घनी जुल्फों कि छाओं में !
सितारे, चाँद और सूरज,
जहां जाने को मरते हैं !

ad27sh28
Member
# Posted: 31 Jul 2010 11:13
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हमें मालूम ही कब था,
तेरे क़दमों कि आहट पर,
गुलाबी मुस्कराहट पर !
तेरे होंठों कि जुम्बिश पर !
तेरे सर के इशारे पर !
सदा-ऐ-दिलबराना पर !
निगाह-ऐ-कातिलाना पर !
जाफा-ऐ-मेहरबाना पर !
अदा-ऐ-काफिराना पर !
चमन के फ़ूल ये सारे,
किस कदर ध्यान देते हैं !
तेरी एक झलक क़ी खातिर,
ये अपनी जान देते हैं

ad27sh28
Member
# Posted: 2 Aug 2010 20:24
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चांदनी हर तरफ बिखरती है !
तेरे छत पर होने से,
चाँद कैसे निखरता है !
तेरी पायल क़ी छन छन !
मन में क्या सुर बजाती है !
तेरी आवाज वीराने में,
क्या जादू जगाती है |
तेरे नगमें फिजा में
किस तरह जादू जागते हैं !
बहुत पुख्ता इरादे फरिश्तों के
यूँ छन से टूट जाते हैं !

ad27sh28
Member
# Posted: 2 Aug 2010 20:26
Reply 


चांदनी हर तरफ बिखरती है !
तेरे छत पर होने से,
चाँद कैसे निखरता है !
तेरी पायल क़ी छन छन !
मन में क्या सुर बजाती है !
तेरी आवाज वीराने में,
क्या जादू जगाती है |
तेरे नगमें फिजा में
किस तरह जादू जागते हैं !
बहुत पुख्ता इरादे फरिश्तों के
यूँ छन से टूट जाते हैं !

ad27sh28
Member
# Posted: 2 Aug 2010 20:30
Reply 


हमारा इरादा ही कब था ?!
हमें खुद पर भरोसा था !
हमारे साथ किसी सूरत,
भी ऐसा ना होगा !
दिल-ऐ-नादान कभी
काबू से बेकाबू ना होगा !
ये फकीरों क़ी सीरत वाला
कभी दुनियादार ना होगा !

मगर
मगर फिर ये हुआ जाना !
ना जाने क्यूँ हुआ जाना !
बड़ा अफ़सोस हुआ जाना !
तेरी आँखों क़ी एक जुम्बिश,
से घायल हो गए हम भी !
बड़े शिकारी बनते थे!
शिकार हो गए हम भी !
बड़े बुड्ढों क़ी बातों के ,
कायल हो गए हम भी क़ी...
मुहब्बत रोग है जाना,
अजब संजोग है जाना,
ये कैसा जोग है जाना |

ad27sh28
Member
# Posted: 23 Aug 2010 09:45
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जिक्र बेवफ़ाई का जब किया जाएगा
उसके साथ तेरा नाम लिया जाएगा ।

हाल अच्छा अपना कहें तो किस तरह
जुबां खुलेगी जब जाम पिया जाएगा ।

आलम है कि यहाँ कोई हम सफर नहीं
बात बनेगी जब कहीं दिल दिया जाएगा ।

कहते हैं वो हमसे मिलने की फुर्सत नहीं
तसल्ली है जनाजे पे मिल लिया जाएगा ।

ad27sh28
Member
# Posted: 23 Aug 2010 09:48
Reply 


बात की थोड़ी सी और वो रूस्वा हो गए
बनेगी बात कैसे जो न किया जाएगा ।

अभी तो बैठे हैं खयालों में खोए हुए
देखेंगे जो महफिल में याद किया जाएगा ।

उनकी वसीयत थी जनाजे पे न रोए कोई
नई बात नहीं दिल थाम लिया जाएगा ।

मंज़िल की ये दौड़ तो खत्म होने से रही
चलो अब कहीं आराम किया जाएगा ।

उसे खबर है कि उनके इन्तेज़ार में ad27
अपनी जिंदगी यूँ बरबाद किया जाएगा ।

ad27sh28
Member
# Posted: 25 Aug 2010 10:26
Reply 


एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .

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