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मंजिल मिली, मुराद मिली, मुद्दआ मिला
सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक्श-ए-पा मिला
- सीमाब अकबराबादी | अब क्या बताऊं मैं तेरे मिलने से क्या मिला
इरफान-ए-गम हुआ मुझे दिल का पता मिला
- सीमाब अकबराबादी | बात साकी की न टाली जाएगी
करके तौबा तोड़ डाली जाएगी
- हबीब जलील | गम मुझे, हसरत मुझे, वहशत मुझे, सौदा मुझे
एक दिल देके खुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
- सीमाब अकबराबादी | दुश्मन को भी सीने से लगाना नहीं भूले
हम अपने बुजुर्गों का जमाना नहीं भूले
- सागर आजमी | मैयत न मेरी जा के वीराने में रख देना
पैमानों में दफना के मैखाने में रख देना
- सीमाब अकबराबादी | कांटों से गुजर जाना, शोलों से निकल जाना
फूलों की बस्ती में जाना तो संभल जाना
- सागर आजमी | किस-किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया
गैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया
- शहरयार | मैनोशी के आदाब से आगाह नहीं है तू
जिस तरह कहे साकी-ए-मैखाना पिए जा
- अख्तर शीरानी | मैं नजर से पी रहा हूं, ये समां बदल न जाए
न झुकाओ तुम निगाहें, कही रात ढल न जाए
- अनवर मिर्जापुरी | पहलू से दिल को लेके वो कहते हैं नाज से
क्या आएं घर में आप ही जब मेहरबां न हों
- मौलाना मुहम्मद अली जौहर | सारी दुनिया सो जाती है, मैकश हम उठकर रोते हैं
किस तरह गुजरती हैं रातें, तुम क्या समझो, तुम क्या जानो
- मैकश | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 [Next] [Last Page]
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