यूं तो आजकल इंटरनेट पर चुटकुलों की भरमार है लेकिन पुराने चुट्कुले फिर भी देखने को कम ही मिलते हैं। इनमें से कई सत्य घटनाओं से प्रेरित होते हैं कई शुद्ध गप्प। जो भी हो इनमें हास्य तो होता ही है साथ ही पुराने समय की झलक भी देखने को मिल जाती है । पढ़िये तीन ऐसे ही चुट्कुले - 



विश्वासपात्र  

द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था। सिपाहियों को बड़ी मुश्किल से छुट्टी मिलती थी। 

इसी दौरान एक कुँवारे अंग्रेज़ सिपाही को किस्मत से छुट्टी मिली तो घर आते ही सबसे पहले उसने शादी कर ली। 

उसकी पत्नी बहुत खूबसूरत थी, और उसकी अनुपस्थिति में वह किसी और से आँखें चार न कर बैठे इस डर से सिपाही ज़्यादातर समय घर पर ही रहता था। 

वह अपने किसी दोस्त को भी अपने घर के भीतर फटकने न देता था। 

लेकिन एक दिन अचानक उसकी यूनिट पर हमला हुआ और उसके लिए फिर से लड़ाई पर जाने का बुलावा आ गया। 

वह पत्नी को अकेली छोडकर किसी भी तरह जाना न चाहता था लेकिन युद्ध चल रहा था और ऐसे समय में उसे जाना अनिवार्य था। 

लिहाजा बहुत सोचविचार कर उसने बीवी घर में बंद कर बाहर से ताला लगाया और अपने एक बहुत ही पुराने विश्वासपात्र दोस्त के हाथ में चाभी देकर बोला - "मैं ड्यूटी पर जा रहा हूँ लेकिन वहाँ हाजिरी देकर तुरंत लौट आऊँगा। फिर भी यदि मैं चार दिनों में न लौटूँ तो तुम इस चाभी से ताला खोलकर उसे आज़ाद कर देना ... "

इतना कहकर वह मोर्चे की ओर चल दिया। 

अभी वह अपने गाँव से थोड़ी ही दूर पहुंचा था कि उसने देखा, उसका दोस्त पीछे से सरपट घोडा दौड़ाता हुआ, उसे आवाज़ देता हुआ चला आ रहा है .... 

दोस्त नजदीक आते ही चिल्लाया - "धोखेबाज़ .... तू मुझे गलत चाभी देकर जा रहा है । इस चाभी से तो ताला खुल ही नहीं रहा .... !!! 

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कुछ तो लोग कहेंगे 

रेलवे स्टेशन के Enquiry Counter पर एक साहब वहाँ मौजूद कर्मचारी पर बहुत बिगड़ रहे थे – “आपकी गाडियां देर से ही आती हैं तो फिर ये  टाइम-टेबल क्यों लगा रखे हैं ?”

कर्मचारी ने विनम्रता से कहा – “महाशय, अगर गाडियां बिलकुल समय पर आने लगें तो फिर कल आप मेरे पास आकर पूछेंगे कि ये वेटिंग रूम क्यों बनाए हैं ?”
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जिगरी दोस्त का फोन 

राय साहब घर पहुंचे तो नौकर ने बताया – “थोड़ी देर पहले  आपके जिगरी दोस्त का फोन आया था.”

राय साहब – “तूने कैसे जाना वो मेरा जिगरी दोस्त है ?”

नौकर – “उन्होंने कहा था कि वो ‘कमीना’ आ जाए तो उसे कहना मुझे फोन करे…..”
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