सच्चा फैसला - अरबी लोककथा | Sachcha Faisala - Lokkatha in Hindi

अरब के किसी गाँव में एक सौदागर रहता था. उसके चार बेटे थे. सौदागर बूढ़ा हो चला था. वह चाहता था कि उसके चारों बेटे मिलकर रहें लेकिन धीरे धीरे उनमें फूट पड़ गई और वे अलग - अलग रहने लगे. 

सौदागर ने बेटों के बीच मेल कराने की बड़ी कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. आखिर उसने अपनी जायदाद चारों को बराबर बराबर बाँट दी. उसके पास एक कुत्ता भी था. उसने कहा कि कुत्ते पर चारों बेटों का हक बराबर होगा. 

एक दिन सौदागर मर गया. बेटों के बीच दूरियां और बढ़ गईं. 

एक दिन ये हुआ कि कुत्ते की टांग टूट गई. एक बेटे ने उस टांग पर तेल की पट्टी बाँध दी. दूसरे दिन जब कुत्ता चूल्हे के पास लेटा हुआ था कि अचानक तेल की पट्टी में आग लग गई. कुत्ता डर और जलन के मारे भागा और खलिहान में जा पहुंचा. देखते ही देखते खलिहान में आग लग गई और वहाँ रखा सारा अनाज जल कर ख़ाक हो गया. 

अब तीनों भाई चौथे से झगड़ने लगे कि उसी के कारण यह नुकसान हुआ है. चौथा भाई अपनी सफाई देने लगा कि उसने क्या किया है उसने तो महज कुत्ते की टूटी टांग पर पट्टी बाँधी थी. 

उस गाँव में एक काज़ी साहब रहते थे जो बड़े इन्साफ-पसंद थे. उनके पास जो भी शिकायत आती वे उसका फैसला एकदम 'दूध का दूध और पानी का पानी' की तरह करते थे. 

सौदागर के बेटों का झगड़ा भी क़ाज़ी की अदालत में पहुंचा. उन्होंने पहले तीनों भाइयों की शिकायत सुनी. फिर चौथे भाई को बुलवाया और उसके भी बयान दर्ज किये. 

दोनों पक्षों का बयान सुनने के बाद क़ाज़ी साहब ने ये फैसला सुनाया - 

"इस कुत्ते पर चारों का हक़ बराबर है. उसकी एक टांग टूट गई और एक ने उस पर पट्टी बाँध दी. दूसरों को उस कुत्ते पर कोई दया नहीं आई. बेशक, उस पट्टी में आग लग गई और खलिहान का अनाज जल गया, लेकिन इस बात का ख़याल रखना चाहिए, कि कुत्ता उस टांग से चलकर खलिहान में नहीं गया. तीन टांगों से ही चलकर वह खलिहान में गया था. इसलिए जो भी नुकसान हुआ वो तीन सही टांगों की वजह से हुआ न कि टूटी टांग की वजह से क्योंकि उस टांग से तो कुत्ता चल ही नहीं सकता था. 

टूटी टांग पर जिसने पट्टी बाँधी, वह टांग उसी भाई के हक की है.  तीन टाँगे बाक़ी तीनों भाइयों के हक की हैं इसलिए उन तीनों को मिलकर चौथे भाई के नुकसान का हर्जाना देना होगा."

काज़ी का फैसला सुनकर तीनों भाई अपना सा मुँह लिए घर चले आये. 




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