तीन मनोकामनाएँ - हिन्दी लोक कथा | Teen Manokaamanaayen - A Hindi Lok Katha

 एक गाँव में एक युवक था. पढ़ा लिखा विद्वान्, किन्तु गरीब. 

दूसरे गाँव में एक युवती थी. गुणवान और सुशील, किन्तु साधारण शक्ल-सूरत वाली. 

दोनों का विवाह हो गया. 

युवक अपनी पत्नी को उसके गुणों के कारण पसंद करता था किन्तु एक टीस उसके मन में सदैव रहती, 'काश ! मेरी पत्नी सुन्दर और तीखे नैन-नक्श वाली होती !'

एक बार गाँव में एक सिद्ध महात्मा जी आये और संयोग से इन्हीं गरीब दंपत्ति के घर ठहरे. तीन दिनों तक दोनों पति-पत्नी ने महात्मा जी की खूब सेवा-सुश्रूषा की. प्रसन्न होकर, चलते समय महात्मा जी ने युवक को तीन नारियल दिए और कहा - "बेटा, ये तीन नारियल मैं तुम्हें दे रहा हूँ. ये कोई साधारण नारियल नहीं बल्कि मनोकामना पूरी करने वाले नारियल हैं. इनमें से प्रत्येक नारियल फोड़ते समय तुम जो भी एक कामना करोगे वह पूर्ण हो जायेगी. अर्थात, ये तीन नारियल तुम्हारी तीन मनोकामनाएं पूर्ण कर देंगे. किन्तु ध्यान रखना, इन्हें एक साथ मत फोड़ना, बल्कि सोच समझकर अपनी आवश्यकतानुसार एक-एक करके ही फोड़ना, ताकि तुम्हें जीवन में किसी चीज़ का अभाव न रहे."

इतना कहकर महात्माजी चले गए. अब पति-पत्नी दोनों बैठे कि पहला नारियल फोड़ने पर कौनसी मनोकामना की जाए. पति बोला - "मेरी तो सबसे पहली इच्छा यही है कि तुम परियों जैसी सुन्दर रूपवती बन जाओ."

पत्नी झुंझला कर बोली - "मेरे सुन्दर होने से क्या होता है ? आपको हमारी गरीबी दिखाई नहीं देती ? यहाँ हर रोज़ यही चिंता बनी रहती है कि कल भोजन का इंतजाम कैसे होगा और आपको मेरे सुन्दर होने की पड़ी है !"

पति बोला - "अरे तो हमारे पास दो नारियल और भी रहेंगे न ! उन्हें फोड़ते वक़्त धन दौलत भी मांग लेंगे. पहले तुम सुन्दर तो बन जाओ. क्या तुम नहीं चाहतीं कि तुम सुन्दर दिखने लगो ?"

अब संसार में ऐसी कौन स्त्री होगी जो सुन्दर नहीं दिखना चाहेगी, सो वह भी बस सिर झुकाकर चुप रह गई. पति समझ गया और उसने पहला नारियल फोड़ दिया. मनोकामना वही कि पत्नी अत्यंत सुन्दर, रूपवती बन जाए. 

नारियल फोड़ते ही चमत्कार सा हुआ. उसकी साधारण शक्ल-सूरत वाली पत्नी, पल भर में देवलोक की किसी अप्सरा जैसी सुन्दर बन गई. पत्नी तो अद्भुत रूप पाकर प्रसन्न हुई ही, पति की ख़ुशी का तो जैसे ठिकाना ही न रहा. 

अब जैसा कि स्वाभाविक था, युवक की पत्नी का रातोंरात सुन्दर बन जाना पूरे गाँव में चर्चा का विषय बन गया. युवक जब ये चर्चाएँ सुनता तो फूला न समाता. अहा ! मेरी पत्नी इतनी सुन्दर ! पत्नी के सौन्दर्य ने उसके ऊपर कुछ ऐसा जादू किया कि वह अपनी गरीबी को कुछ समय के लिए जैसे भूल ही गया. 

एक रोज किसी जरूरी काम से उसे दूसरे गाँव जाना था. उसने पत्नी से कहा - "मैं जरा दूसरे गाँव जा रहा हूँ. दो तीन दिन में लौट आऊंगा. इस बीच तुम जरा होशियार रहना और घर छोड़कर कहीं मत जाना." इतना कहकर वह चला गया. 

होनहार की बात, युवक का जाना हुआ और अगले ही दिन उस राज्य के राजा का उसके गाँव से गुजरना हुआ. वह घोड़े पर बैठा अपने अंगरक्षकों के साथ युवक के घर के सामने से गुजरा. दैवयोग से उस समय युवक की पत्नी बाहर पौधों को पानी दे रही थी. 

राजा की दृष्टि जैसे ही उस अद्भुत सुंदरी स्त्री पर पड़ी, वह देखता ही रह गया. 'यह तो देवलोक की कोई अप्सरा जैसी लगती है, यह इस झोपड़ी में क्या कर रही है ?' राजा ने सोचा, 'इसे तो मेरे महल में होना चाहिए.'

राजा ने तुरंत युवक की पत्नी के समक्ष रानी बनने का प्रस्ताव रख दिया. युवक की पत्नी ने बताने की कोशिश की  कि वह विवाहिता है और उसका पति बाहर गया है किन्तु राजा के ऊपर उसके सौंदर्य का जादू कुछ इस तरह चल चुका था कि उसने कुछ सुना ही नहीं. वह बल प्रयोग करके उसे अपने महल में ले आया और कैद करके रख लिया. अब वह उसे अपनी रानी बनाने के लिए मनाने में जुट गया. 

बेचारी पत्नी, खाना पीना छोड़ कर युवक की याद में रोने कलपने लगी और उन महात्मा जी को कोसने लगी जो मनोकामना पूरी करने वाले नारियल देकर गए थे. न वे नारियल होते, न वह सुन्दर बनती और न ही आज यह दिन देखना पड़ता !

उधर, युवक जब घर लौटा तो उसे गाँव वालों से सारा हाल पता चला. दुष्ट राजा उसकी असहाय पत्नी को उठा ले गया है, यह सुनकर उसके तनबदन में आग लग गई. उसने क्रोध में आकर तुरंत दूसरा नारियल फोड़ा और मनोकामना की - "हे भगवान ! मेरी पत्नी खूँखार भालू बन जाए !"

बस फिर क्या था, राजा के महल में बैठी उसकी पत्नी खूंखार भालू बन गई. उस रात जब राजा खूब बनठन कर उसे राजी करने आया तब उसका सामना किसी अप्सरा की जगह एक खूंखार भालू से हुआ. भालू गुर्राते हुए उस पर टूट पड़ा और कुछ ही मिनटों में उसने राजा को चीर - फाड़ डाला. 

राजा की चीख-पुकार सुनकर जो पहरेदार बचाने आये, भालू ने उन्हें भी नहीं बख्शा. इसके बाद वह भालू अपने घर, अर्थात युवक के गाँव की ओर चल पड़ा. 

भालू जब युवक के सामने पहुंचा तो युवक को बहुत दुःख हुआ. वह सोचने लगा - "हाय, मेरी पत्नी को मेरी वजह से कितने कष्ट उठाने पड़े ! अगर मैंने उसके सुन्दर होने की कामना न की होती तो आज उसकी यह दशा न होती."

यह सोचते हुए उसने तीसरा नारियल उठाया और फोड़ते हुए मनोकामना की - "मेरी पत्नी का रूप पहले जैसा ही हो जाए !"

तुरंत उसकी पत्नी पहले जैसी थी, वैसी ही हो गई. 

मनोकामना पूरी करने वाले तीनों नारियल फूट चुके थे. फिर इसके बाद उन्हें जीवन से किसी तरह की कोई शिकायत न रही.




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