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5/01/2021

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वो भारतीय, जिसने बताया कि Peak XV दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है

 

8850 मीटर ऊँची दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट के बारे में तो आप सबने सुना-पढ़ा होगा पर क्या आपको इस चीज का अंदाजा है कि इस चोटी की ऊंचाई को सबसे पहले एक भारतीय ने मापा था ना कि ब्रिटिश सरकार के किसी अधिकारी ने. 

वह भारतीय था राधानाथ सिकदर जो इतने बड़े योगदान के बाद भी इतिहास के पन्नो में कही खो गया. जिस शख्स की शोहरत पूरी दुनिया में होनी चाहिए उसके बारे में आज शायद ही किसी को पता होगा. इस वीडियो में जानिये पूरी कहानी –


4/29/2021

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100 साल पहले एक औरत इसलिए प्रसिद्ध हुई थी कि उसे कोई हंसा नहीं सकता था

 दुनिया में हर रोज घोटाले उजागर होते हैं. कई घोटाले आपने सुने होंगे लेकिन आज हम आपको एक अजीबोगरीब घोटाले के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे आप ‘मुस्कान घोटाला’ या ‘हंसी घोटाला’ कह सकते हैं. ये घोटाला कोई 100 साल पहले हुआ था. पूरा किस्सा जानने के लिए इस पोस्ट को आखिर तक पढ़ते रहिये.

न्यूयॉर्क में एक थिएटर हुआ करता था जिसका नाम था Hammerstein’s जिसे 1904 से 1914 Willie Hammerstein नामक शख्स चलाया करता था. इस थिएटर में लोगों के मनोरंजन के लिए तरह तरह के छोटे- छोटे एक्ट हुआ करते थे जैसे कि आजकल स्टैंडअप कॉमेडी शोज में होते हैं.

Wikimedia Commons


1907 में इस थिएटर से एक नाम जुड़ा, Sober Sue. ये एक महिला थी जिसके बारे में कहा गया कि इस महिला को कोई हंसा नहीं सकता है. थिएटर के मालिकों ने इस महिला को हंसाने वाले के लिए 1000 डॉलर का इनाम रखा.

शुरू शुरू में दर्शकों में से कई लोगों ने इस महिला के सामने तरह तरह की हरकतें करके, चुटकुले सुनाकर हंसाने का प्रयास किया, लेकिन विफल रहे. बाद में इस महिला को हंसाने के लिए प्रोफेशनल कॉमेडियन भी आने लगे मगर Sober Sue को न हँसना था और न वो हंसी. यहाँ तक कि उसने कभी एक छोटी सी मुस्कान तक न बिखेरी.

बहरहाल, Sober Sue ‘कभी न हंसने वाली महिला’ के रूप में विख्यात हो गईं और उसकी प्रसिद्धि के चक्कर में थिएटर वालों का धंधा भी खूब चला. स्टेज पर अपनी उपस्थिति के लिए Sober Sue को 20 डॉलर प्रति सप्ताह दिए जाते थे जो उस जमाने के हिसाब से ठीक ही थे. Sober Sue को हंसाने के लिए कई बड़े बड़े कॉमेडियन्स ने चैलेंज स्वीकार किया और फ्री में उस थिएटर में अपनी परफॉरमेंस दी मगर उस महिला को हंसा न सके.

लेकिन जैसे कि हर ढोल की पोल आखिर खुलती ही है, थिएटर वालों की पोल भी एक दिन खुल ही गई. आखिर Sober Sue को हंसी क्यों नहीं आती, लोग जब इस बात के पीछे पड़े और जानकारी जुटाई तो जो राज पता चला उससे थिएटर वालों की जम कर थू थू हो गई.

पता चला कि Sober Sue तो हंसी आने के बावजूद भी चाहकर भी नहीं हंस सकतीं क्योंकि उनके चेहरे की वे मांसपेशियां, जिनसे हंसी या मुस्कान के भाव प्रदर्शित होते हैं, लकवाग्रस्त हैं. अर्थात वह महिला मन ही मन चाहे कितना ही हंस ले, चेहरे पर उसे दिखाने में समर्थ ही नहीं थी. इस बात का पता जब उन कॉमेडियन लोगों को चला जिन्होंने Sober Sue को हंसाने के चक्कर में फ्री में HammerStein के थिएटर में परफॉर्म किया, तो वे ठगे से रह गए और उन्होंने इसके लिए थिएटर मालिकों को कभी माफ़ नहीं किया.

(Featured Image Source : Note - Not the actual photograph of Sober Sue)

3/09/2021

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दुनिया की सबसे अजीबोगरीब वसीयत करने वाला आदमी

बात सन 1926 की है जब चार्ल्स मिलर नाम का एक अविवाहित और निसंतान वकील बड़ी अजीबोगरीब वसीयत छोडकर मर गया। उसने अपनी वसीयत में लिखा कि उसकी संपत्ति का एक बड़ा भाग शहर की उस महिला को दे दिया जाये तो उसकी मौत के अगले 10 साल में सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करके दिखाये। 

इसके बाद बच्चे पैदा करने की जो होड़ शुरू हुई उसे कनाडा के इतिहास में The Great Stork Derby of Toronto के नाम से जाना जाता है। 

1854 में जन्मे Charles Vance Millar अपनी मौत होने तक कोई बहुत बड़ी नामचीन हस्ती नहीं थे, हालांकि मज़ाकिया स्वभाव  ने शादी नहीं की थी और नतीजतन उनके कोई अपने बच्चे भी नहीं थे। हाँ, आर्थिक रूप से काफी मजबूत थे और काफी संपत्ति छोडकर मरे थे । 

मौत से पहले चार्ल्स मिलर ने अपनी काफी मज़ाकिया वसीयत लिखी थी, जिसमें सबसे ज्यादा चर्चित क्लॉज़ था, अगले 10 सालों में सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिला को अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा देना। संपत्ति का ये हिस्सा आज के हिसाब से लगभग 10 मिलियन डॉलर के बराबर था। 

अब इतनी बड़ी रकम किसी के भी मन में लालच पैदा कर देने के लिए काफी होती है। तो टोरंटो की महिलाओं में बच्चे पैदा करने की होड़ लग गई। करीब 11 परिवार आखिर तक होड़ में डटे रहे लेकिन अवधि पूरी होने पर उनमें से केवल चार ही युगल ऐसे सामने आए जिन्होने सर्वाधिक 9 - 9 बच्चे पैदा किए। 

न्यायालय द्वारा मिलर द्वारा निर्दिष्ट संपत्ति को चारों परिवारों में बराबर बाँट दिया गया। 

इसके अलावा भी मिलर ने अपनी वसीयत में कई मज़ाकिया बातें लिखी थीं। जैसे कि अपनी एक संपत्ति को वे ऐसे तीन वकीलों के आजीवन उपभोग के लिए छोड़ गए जो आपस में एक दूसरे से शत्रु की तरह नफरत करते थे। इस संपत्ति को, जो कि, जमैका में एक holiday estate थी, न तो ये वकील बेच सकते थे, और न ही उनमें से कोई अकेला उसका उपयोग कर सकता था। शर्त के अनुसार तीनों एक साथ ही इसका उपभोग कर सकते थे।  

3/05/2021

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27 अरब की दौलत का मालिक है ये कुत्ता ... कैसे आई इतनी दौलत ?

दुनिया का सबसे अमीर जानवर - Gunther IV (Richest animal in the World)

दुनिया में बहुत से पालतू जानवर हैं जो ऐशोआराम और ठाटबाट की ज़िंदगी जीते हैं लेकिन उनका वह ऐशोआराम अपनी खुद की दौलत के दम पर नहीं बल्कि उनके मालिकों की दौलत के दम पर होता है। कुछेक ही जानवर ऐसे हैं जिनके पास अपनी खुद की दौलत है, जिसके मालिक वे खुद हैं, और इनमें टॉप पर है ये जर्मन शेफर्ड, जिसका नाम है Gunther IV

क्या आप जानते हैं Gunther IV नाम का ये कुत्ता कितनी दौलत का मालिक है ? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये कुत्ता लगभग 400 मिलियन डॉलर की संपत्ति का मालिक है और संभवतः दुनिया का सबसे अमीर जानवर है। सबसे बड़ी बात ये है कि Gunther IV के पास जो संपत्ति है वह उसे अपने पिता से मिली है यानी वो एक खानदानी रईस है। 

तो आखिर इस कुत्ते की रईसी का राज क्या है ? 

कुत्तों के इस रईस खानदान की कहानी सन 1991 में शुरू होती है जब कार्लोटा लिबेन्स्टीन नाम की एक जर्मन काउंटेस का निधन हो गया। काउंटेस काफी अमीर थीं और उस समय उनकी संपत्ति की कीमत लगभग 100 मिलियन डॉलर थी।  दिलचस्प बात ये थी कि दुनिया में उनका कोई भी ऐसा निकट संबंधी नहीं था जिसे वे अपनी संपत्ति दे जातीं। अगर कोई उनके सर्वाधिक निकट था तो वह था उनका कुत्ता Gunther II. इसलिए अपनी वसीयत में वे अपनी सारी संपत्ति अपने कुत्ते के नाम लिख गईं। 

कानूनी तौर पर जानवर सम्पत्तियों के मालिक नहीं हो सकते इसलिए ऐसी स्थिति में जानवरों के नाम पर छोड़ी  गई सम्पत्तियों का ट्रस्ट बना दिया जाता है। ट्रस्टी सदस्य ही संपत्ति की देखभाल करते हैं और उसे लाभार्थी जानवर के कल्याणार्थ कैसे खर्च करना है यह तय करते हैं। 

Gunther II  के बाद भी संपत्ति का दुरुपयोग न हो या उसे कोई हड़प न ले इसलिए काउंटेस कार्लोटा ने वसीयत में प्रावधान किया कि उनकी संपत्ति के लाभार्थी Gunther II और उसके बाद उसके वंशज  रहेंगे। और फिर यहीं से शुरू हो गई Gunther Dynasty ...

आज Gunther खानदान का वारिस Gunther IV है। ट्रस्ट के सदस्यों के सूझबूझ भरे निवेश के कारण उसकी संपत्ति बढ़कर 375 मिलियन डॉलर के आसपास पहुँच चुकी है। वह मियामी के एक आलीशान मैनशन में रहता है और अपनी लिमोजीन कार में चलता है।  उसकी सेवा में नौकरचाकरों की फौज लगी रहती है और वह दुनिया का बेहतरीन से बेहतरीन खाना खाता है। ज़्यादातर इन्सानों के लिए जो ऐशोंआराम एक सुखद स्वप्न हैं वो इस कुत्ते को सहज ही उपलब्ध हैं। 

हालांकि दुनिया में और भी कई पालतू जानवर हैं जिनके नाम उनके मालिकों ने संपत्ति छोड़ी है लेकिन जितनी Gunther Dynasty के पास है, उतनी किसी के पास नहीं। 

2/18/2021

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अघोरेश्वर बाबा कीनाराम और लोलार्क षष्ठी

 लोलार्क षष्ठी या ललई छठ एक हिन्दू त्यौहार है जो हर वर्ष हिन्दू कलेंडर के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की छठवीं तिथि को मनाई जाती है। इस पर्व के सूत्र सत्रहवीं सदी के एक प्रसिद्ध अघोरी संत बाबा कीनाराम से जुड़े माने जाते हैं, जो अपनी अलौकिक शक्तियों के लिए विख्यात थे।


बाबा कीनाराम का जन्म सन 1601 ई॰ में चंदौली (उत्तरप्रदेश) के रामगढ़ गाँव के अकबर सिंह और मनसादेवी के घर  हुआ था। कहा जाता है कि अपने जन्म के बाद आम शिशुओं की तरह बाबा तीन दिनों तक न तो रोये और न ही उन्होने अपनी माता का दूध पिया। तीन दिन बाद तीन साधु (लोक मान्यता है कि वे तीनों साधु ब्रह्मा, विष्णु, महेश थे) वहाँ आए और उन्होने बाबा को अपनी गोद में लिया और उनके कान में कुछ कहा। आश्चर्यजनक रूप से उन साधुओं से मिलने के बाद बाबा अपने जन्म के बाद पहली बार रोने लगे। तभी से जन्म के पाँच दिन बाद की तिथि लोलार्क षष्ठी या ललई छठ के रूप में मनाई जाने लगी।

बाबा बाल्यावस्था से ही विरक्त रहते थे और थोड़े बड़े होने पर उन्होने घर भी छोड़ दिया । वे उस समय के अनेक सुप्रसिद्ध साधकों जैसे संत शिवाराम, औघड़ कालूराम आदि के सानिध्य में भी रहे और अपना जीवन उन्होने साधना करने और अपनी सिद्धियों को लोक-कल्याणार्थ उपयोग करने में लगाया। उनके अलौकिक चमत्कारों की अनेक कहानियाँ प्रसिद्ध हैं जिन्हें आप विकिपीडिया पर यहाँ पढ़ सकते हैं ।

बाबा किनाराम ने 'विवेकसार', 'रामगीता', 'रामरसाल' और 'उन्मुनिराम' नाम की चार पुस्तकें लिखीं जिनमें से 'विवेकसार' अघोर पंथ के सिद्धांतों पर अत्यंत प्रामाणिक पुस्तक मानी जाती है।

सन 1769 में करीब 170 वर्ष की आयु में बाबा ने समाधि ले ली और ये नश्वर शरीर त्याग दिया। वाराणसी में आज भी बाबा किनाराम स्थल बना हुआ है जिसकी स्थापना बाबा द्वारा ही की गई थी। हर साल उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में बाबा का जन्मदिन उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। 2019 में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यक्रम में भाग लिया था और उन्होने कहा था कि बाबा किनाराम के जन्मस्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

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बकरियों ने वीडियो कॉल करके कमाए 50 लाख रुपये ! किसान ने निकाला कमाल का बिजनेस आइडिया

 अङ्ग्रेज़ी में कहावत है An Idea can change your life ! कभी कभी कुछ कमाल के आइडिया ऐसे होते हैं जिन पर उन्हें करने वाले को भी विश्वास नहीं होता कि ये मैंने क्या कर डाला।


AFP की रिपोर्ट के अनुसार एक ब्रिटिश किसान Dot McCarthy को लॉकडाउन के दौरान ऐसा ही एक आइडिया आया जो शुरू तो मज़ाक मज़ाक में हुआ था लेकिन उससे उन्होने करीब 50 हजार पाउंड कमा डाले। भारतीय रुपयों में ये रकम लगभग 50 लाख रुपयों के बराबर होती है। आइडिया आप सुनेंगे तो हैरान रह जाएँगे।

कोरोना संकट के दौरान जब अधिकांश कंपनियों में 'वर्क फ्राम होम' हो रहा था और कर्मचारियों की मीटिंग्स वीडियो काल्स के माध्यम से हो रहीं थीं, तब इस किसान ने अपनी बकरियों को वीडियो मीटिंग्स के दौरान किराये पर देने का बिजनेस शुरू किया।


ये महिला किसान मोबाइल के माध्यम से अपनी बकरियों को Zoom Video meetings में जोड़ती थी और उसकी बकरी मीटिंग में मौजूद अन्य व्यक्तियों के साथ दिखाई देने लगती थी। अपनी मीटिंग में इस अनोखे मेम्बर को देखकर बाकी सदस्यों के चेहरों पर मुस्कान आ जाती थी और यही वजह रही कि किसान का बिजनेस चल निकला।

उसने एक मीटिंग की फीस रखी 5 पाउंड, वो भी 5 मिनट की कॉल के लिए। कोरोना काल में लंबी लंबी बोरियत भरी वीडियो मीटिंग्स में हल्के फुल्के मज़ाक के रूप बकरियों को शामिल करने का ये आइडिया हिट हो गया और किसान ने 50 हजार पाउंड कमा डाले।