5/20/2021

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दस दिनों की मोहलत

बहुत पुरानी बात है किसी राज्य में एक क्रूर राजा राज्य करता था. उसने 10 खूँखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे जिनका इस्तेमाल वह अपराधियों और शत्रुओं को मौत की सजा देने के लिए करता था.

एक बार राजा अपने एक पुराने मंत्री से किसी बात पर नाराज़ हो गया. गुस्से में उसने मंत्री को खूँखार कुत्तों के सामने फिंकवाने का आदेश दे डाला. परंपरा के अनुसार मृत्युदंड से पहले मंत्री की आखिरी इच्छा पूछी गई.

मंत्री ने कहा – “महाराज, मैंने पूरे जीवन आपकी और इस राज्य की निष्ठापूर्वक सेवा की है. मैं चाहता हूँ कि आप मुझे दस दिनों की मोहलत दें ताकि मैं अपने कुछ जरूरी काम निपटा सकूँ …”

मंत्री की बात सुनकर राजा ने सजा 10 दिनों के लिए टाल दी.

10 दिनों के बाद राजा के सैनिक मंत्री को पकड़कर लाये और राजा का इशारा पाते ही उसे कुत्तों के सामने फेंक दिया. परन्तु यह क्या ? कुत्ते मंत्री पर टूट पड़ने के बजाये उसके आगे पूँछ हिलाने लगे और उसके चारों तरफ कूद-कूद कर खेलने लगे.

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ कि जो कुत्ते इंसान को देखते ही चीर-फाड़ डालते थे वे ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं ?

आखिरकार राजा से रहा नहीं गया, उसने मंत्री से पूछा, ”ये क्या हो रहा है, ये कुत्ते तुम्हे काटने की बजाये तुम्हारे साथ खेल क्यों रहे हैं?”

मंत्री बोला – “महाराज, मैंने आपसे जो 10 दिनों की मोहलत ली थी उसका एक-एक पल मैंने इन बेजुबानों की सेवा में लगा दिया. मैंने रोज इन्हें अपने हाथों से खाना खिलाया, सहलाया, नहलाया और पूरी तरह से इनका ख़याल रखा. ये खूँखार कुत्ते जंगली होने के बावजूद मेरी 10 दिनों की सेवा और प्यार को भुला नहीं पा रहे हैं परंतु खेद है कि आप प्रजापालक हो कर भी मेरी जीवन भर की स्वामीभक्ति भूल गए और मेरी एक छोटी सी त्रुटि पर इतनी बड़ी सजा सुना दी !”

राजा को अपनी भूल का अहसास हो गया. उसने फ़ौरन मंत्री को आज़ाद करने का हुक्म दिया और फिर से ऐसी गलती न करने का प्रण कर लिया.

5/19/2021

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7 Best Websites, जहां पर आप Free Hindi Movies देख सकते हैं

 कोरोना महामारी के इस दौर में आम आदमी घरों में कैद रहने को मजबूर हो गया है। ऐसे माहौल में अकेलेपन और ऊब से उपजी नकारात्मकता को दूर करने का एकमात्र साधन जो उपलब्ध है वह है इंटरनेट आधारित मनोरंजन ।

भारत में Bollywood Movies मनोरंजन का एक बहुत बड़ा साधन हैं लेकिन चूंकि इन दिनों सिनेमाघर बंद हैं इसलिए आप बाहर देखने नहीं जा सकते। इस लेख में हम आपको बताएँगे कि किस तरह आप घर बैठे Hindi Movies देख सकते हैं internet के माध्यम से, वह भी बिलकुल Free और legally!

जी हाँ, इस लेख में हम आपको Movies को download करने का कोई अनैतिक जरिया नहीं बताने वाले हैं, बल्कि ऐसी websites के बारे में बताने वाले हैं जहां जाकर आप Free में Hindi Movies देख सकते हैं। 

हालांकि यहाँ आपको यह भी बताना हम जरूरी समझते हैं कि जिन sites के नाम हम आपको बताने वाले हैं उनमें से कई  पर सारा कंटैंट फ्री में उपलब्ध नहीं है, बल्कि ढेर सारा प्रीमियम कंटैंट भी है जिसके लिए आपको subscription लेना पड़ सकता है। लेकिन फिर भी Free में बहुत कुछ उपलब्ध है, तो क्यों न उसका लाभ उठाया जाये। 

1. Disney+Hotstar

Disney+HotStar (www.hotstar.com) भारत के सबसे लोकप्रिय Online Content Providers में से एक है जहां आप न सिर्फ Movies बल्कि TV Shows और Web series भी देख सकते हैं। 

यह प्लैटफ़ार्म website और mobile app दोनों ही रूपों में उपलब्ध है और प्रीमियम कंटैंट देखने के लिए आपको सब्स्क्रिप्शन लेना पड़ता है। लेकिन इस पर आप टीवी shows और मूवीज फ्री में देख सकते हैं। 

2. ZEE5

ZEE5 भी भारत का एक बेहद लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफॉर्म है जहां प्रीमियम कंटैंट के साथ कई Free Movies भी उपलब्ध हैं जिन्हें आप बिना सब्स्क्रिप्शन लिए देख सकते हैं। 


ZEE5 पर उपलब्ध movies की सूची जो कि free हैं, यहाँ क्लिक करके देखी जा सकती हैं - 

3. Voot 

Voot एक popular OTT platform है जहां पर अन्य websites की तरह प्रीमियम कंटैंट के साथ साथ  आपको कई सारी free online Hindi movies भी देखने को मिल जाएंगी। 

Voot पर फ्री में मूवी देखने के लिए आपको voot.com पर जाकर Movie Mania : Watch for free सेक्शन में जाना होगा। यहाँ आपको फ्री में उपलब्ध मूवीज की सूची मिल जाएगी जिसमें से आप अपनी पसंद की मूवी चुनकर देख सकते हैं। 

4. MX Player

MXPlayer (www.mxplayer.in) फ्री कंटैंट देखने के लिए मेरी favourite website है। इस पर ढेर सारा कंटैंट उपलब्ध है जिनमें न सिर्फ movies बल्कि, tv shows, web shows आदि भी सुगमता से देखे जा सकते हैं। 


Mx Player पर कई लोकप्रिय वेब सिरीज़ भी उपलब्ध हैं जिन्हें आप बिलकुल फ्री में देख सकते हैं। 

5. JioCinema

जैसा कि Jio Cinema के नाम से ही स्पष्ट है कि यह Jio कंपनी का  OTT platform है। यदि आप Jio user हैं अर्थात आपके पास Jio की सिम है तो फिर आप Jio Cinema पर जाकर Free movies देखने का आनंद ले सकते हैं। 


Jio Cinema पर मूवी देखने के लिए आपको खास कुछ नहीं करना है बस जो फिल्म आपको पसंद है उस पर क्लिक करना है। क्लिक करते ही आपसे आपका Jio मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। इस नंबर पर एक ओटीपी आएगा जिसे डालते ही आपकी फिल्म शुरू हो जाएगी। 

6. Airtel XStream

Jio Cinema की ही तरह Airtel XStream टेलीकॉम जायंट एयरटेल का ओटीटी प्लेटफॉर्म है। यदि आप Airtel user हैं तो इस प्लेटफॉर्म पर लॉगिन करके free ऑनलाइन मूवीज देख सकते हैं। 

7. Youtube

Youtube पर भी कई मूवी कंपनियों ने अपने चैनल बना रखे हैं जहां आप हिन्दी फिल्में देख सकते हैं। खासकर यदि आप पुरानी फिल्मों के शौकीन हैं और उन्हें देखना चाहते हैं तो Youtube इसके लिए best जगह है। एक साधारण सी search से आप तमाम पुरानी classic फिल्में खोज सकते हैं और देख सकते हैं। 

5/18/2021

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बूढ़े की सीख (दो शिक्षाप्रद लघुकथाएं)


लघुकथा - 1 (Short Story - 1)

एक गाँव के बाहर एक बूढ़ा आदमी नौजवानों को पेड़ पर चढ़ना उतरना सिखा रहा था. कई युवक पेड़ों पर चढ़ना उतरना सीख रहे थे.

एक युवक से बूढ़े ने कहा – “पेड़ पर चढ़ते उतरते समय बड़ी सावधानी की जरूरत होती है.”

युवक बोला – “इसमें कौनसी बड़ी बात है …”, ऐसा कहते हुए वह युवक वृक्ष की अंतिम चोटी पर पहुँच गया. बूढ़ा देखता रहा.

अब युवक बड़ी सावधानी से उतर रहा था.

जब युवक तीन चौथाई दूरी तक आ गया तो बूढा बोला – “बेटा, संभल कर उतरना, असावधानी व जल्दबाजी न करना…”

बूढ़े की बात सुनकर युवक को बड़ी हैरानी हुई.

वह सोचने लगा कि जब वह पेड़ की चोटी पर चढ़ रहा था तब तो बूढ़ा चुपचाप बैठा रहा, फिर वह उतरने लगा तब भी चुपचाप बैठा रहा, लेकिन अब ज़रा सी दूरी रह गई है तो मुझे सावधान कर रहा है.

जब उसने बूढ़े से यह बात कही तो तो बूढ़ा बोला – “मैं देख रहा था कि जब तुम नीचे उतर रहे थे तब तुम स्वयं ही सावधान थे. जब तुम बिलकुल नजदीक पहुंचे तब मैंने सावधान इसलिए किया क्योंकि लक्ष्य को सरल और समीप देखकर ही अक्सर लोग असावधानी बरतते हैं….”

इतना सुनकर युवक बूढ़े के आगे नतमस्तक हो गया.

लघुकथा - 2 (Short Story - 2)

एक पुरानी चीनी कहानी है.

एक नब्बे साल का बूढा अपने जवान बेटे के साथ अपने बगीचे में स्वयं जुत कर पानी खींच रहा था तभी कन्फ्यूशियस वहाँ से गुजरे.

उन्होंने देखा, नब्बे साल का बूढा, और उसका जवान बेटा, दोनों जुते हैं, पसीने से तरबतर हो रहे हैं, पानी खींच रहे हैं.

कन्फ्यूशियस को दया आई.

वो बूढ़े के पास जाकर बोले – “तुम्हें पता है कि अब तो शहरों में हमने घोड़ों से या बैलों से पानी खींचना शुरू कर दिया है ! तुम क्यों जुते हुए हो इसके भीतर ?”

बूढा बोला – “ज़रा धीरे बोलिए … मेरा बेटा सुन न ले ! आप थोड़ी देर से आइये जब मेरा बेटा घर भोजन करने के लिए चला जाए …”

जब बेटा चला गया तब कन्फ्यूशियस फिर वापस आये और बूढ़े से बोले – “तुमने बेटे को क्यों न सुनने दिया ?”

बूढा बोला – “मैं नब्बे साल का हूँ और अभी तीस साल के नौजवान से लड़ सकता हूँ. लेकिन अगर मैं अपने बेटे के बजाय इसमें घोड़े जुतवा दूँ तो नब्बे साल की उम्र में मेरे जैसा स्वास्थ्य फिर उसके पास नहीं होगा. स्वास्थ्य घोड़ों के पास होगा, मेरे बेटे के पास नहीं होगा. मैं जानता हूँ कि शहरों में घोड़े जुतने लगे हैं और यह भी जानता हूँ कि मशीनें भी बन गई हैं जो कुंए से पानी खींच लेती हैं. अगर मेरा बेटा इसके बारे में सुनेगा तो वो यही चाहेगा हम भी घोड़े और मशीन लगा लें लेकिन जब मशीनें पानी खीचेंगी तो बेटा क्या करेगा ? उसके स्वास्थ्य का क्या होगा ?”

कन्फ्यूशियस उस बूढ़े के सामने निरुत्तर हो गया और सिर झुका कर वहाँ से चला आया.

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भारत की ओर से इस खिलाड़ी ने खेली थी अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच में पहली गेंद

 क्या आप जानते हैं कि जब भारत ने अपना सबसे पहला अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच खेला था तो भारत की ओर से सबसे पहली गेंद का सामना करने वाला खिलाड़ी कौन था ? आइये जानते हैं उस खिलाड़ी के बारे में …

भारत ने अपना सबसे पहला अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड की ही धरती पर लॉर्ड्स के मैदान पर 25 जून 1932 को खेला था. सी.के. नायडू इस मैच में भारतीय टीम के कप्तान थे तथा अन्य खिलाड़ी थे - लाल सिंह, फिरोज पालिया, जहाँगीर खान, मोहम्मद निसार, अमर सिंह, बहादुर कपाड़िया, शंकर राव गोदाम्बे, गुलाम मोहम्मद, जनार्दन नावले, सैयद वज़ीर आली, महाराजा ऑफ पोरबंदर, के एस लिंबड़ी, नज़ीर आली, जोगिंदर सिंह, नऊमल जऊमल, सोरबजी कोलन, नरीमन मार्शल  ।

लेकिन पहली गेंद खेलने का सौभाग्य जिस खिलाड़ी को प्राप्त हुआ उसका नाम था जनार्दन ज्ञानोबा नावले

Janardan Navle is seen standing last in the first row (Image : Wikipedia)

जनार्दन नावले इस मैच की पहली पारी में मात्र 12 रन बनाकर आउट हो गए थे लेकिन अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैचों में भारत की ओर से पहली गेंद खेलने वाले खिलाड़ी के रूप में इतिहास में दर्ज हो गए. यही नहीं, वे भारत की ओर से आउट होने वाले सबसे पहले बल्लेबाज भी बने.

जनार्दन नावले का जन्म एक साधारण किसान परिवार में 7 दिसम्बर 1902 को फुलगाँव में हुआ था. भारतीय टेस्ट टीम में उनका चयन एक विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में हुआ था. 31 वर्ष की उम्र हो जाने के कारण उनका टेस्ट कैरियर ज्यादा लम्बा नहीं चल पाया और वे मात्र 2 टेस्ट मैचों में ही भारतीय टीम का हिस्सा रह पाए.

(The information is about the Indian cricketer who faced first test ball for India in 1932, Janardan Gyanoba Navle)

5/17/2021

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क्रिकेट खेलने का मेहनताना (Funny Story)

 एक वृद्ध रिटायर्ड सज्जन का घर मुंबई की एक संकरी सी गली में था. उनकी एक समस्या थी कि रोज शाम को उनकी गली के सारे लड़के उनके घर के सामने ही क्रिकेट खेला करते थे. खेलते समय वो बच्चे इतना शोर मचाते कि वृद्ध सज्जन का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता. पर वो बच्चों को खेलने से मना करके उनका दिल भी नहीं दुखाना चाहते थे.वो कुछ ऐसा करना चाहते थे कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

एक दिन जब बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे तब वो उनके पास पहुंचे और बोले – “बच्चो, मैं जब छोटा था तब मैं भी बहुत क्रिकेट खेला करता था. तुम लोग जब यहाँ खेलते हो तो मैं तुम्हारा खेल देखता हूँ और इससे मुझे बड़ी ख़ुशी मिलती है. मुझसे वादा करो कि तुम लोग रोज़ यहाँ ऐसे ही क्रिकेट खेलते रहोगे … इसके एवज में मैं तुम्हें सौ  रुपये हर सप्ताह दिया करूँगा !”

अपना पसंदीदा काम करने के पैसे भी मिलेंगे ! यह सुनकर बच्चे खुश हो गए और वृद्ध सज्जन से रोज क्रिकेट खेलने का वादा किया.

इसके बाद बच्चों ने एक सप्ताह तक जम कर क्रिकेट खेली और आखिरी दिन अपने पैसे मांगने पहुँच गए. वृद्ध सज्जन ने मुस्कुराते हुए बच्चों को सौ रुपये दे दिए.

बच्चों ने अगले सप्ताह फिर जम कर क्रिकेट खेली और आखिरी दिन फिर पैसे मांगने पहुँच गए. इस बार वृद्ध बोले – “बच्चो, सौ रुपये कुछ ज्यादा हैं… अब से मैं हर हफ्ते 75 रुपये ही दिया करूंगा.” और उन्होंने 75 रुपये बच्चों को दे दिए.

अगले सप्ताह जब बच्चे फिर पैसे लेने पहुंचे तो सज्जन बोले – “इस बार मेरी पेंशन अभी तक नहीं आई है, ये तीस रुपये पड़े हैं, ये ले जाओ !”

बच्चों ने तीस रुपये ले तो लिए पर वो खुश नहीं हुए. मुँह लटकाए हुए लौट आये.

फिर एक सप्ताह बीता. बच्चे फिर अपने पैसे लेने पहुंचे तो सज्जन बोले – “आज तो मेरे पास 10 ही रुपये हैं … ये ले जाओ !”

ये तो हद थी. एक बड़ा बच्चा बोला – “आप चाहते हैं कि हम 10 रुपल्ली में आपके लिए 7 दिन तक खेलते रहें ? रखिये अपने 10 रुपये … हम इतने में नहीं खेल पायेगे… चलो दोस्तों !”

और उस दिन के बाद से वृद्ध सज्जन के घर के सामने बच्चों का क्रिकेट खेलना बंद हो गया.

(Image : Pixabay.com)

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इंसान तो इंसान, यहाँ तो गधे भी पायजामा पहनते हैं

 फ्रांस के पश्चिमी तट पर Rhea नाम का एक आइलैंड है. गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए पर्यटकों की यह पसंदीदा जगह है. इस आकर्षण के  पीछे जो कारण हैं उनमें आइलैंड की खूबसूरती, वहाँ का खुशगवार मौसम तो है ही, साथ ही एक अन्य आकर्षण भी है और वह है यहाँ के पायजामा पहनने वाले गधे. जी हाँ, गधे ! यानी कि donkey.

Poitou प्रजाति के ये गधे हैं तो गधे ही, पर सामान्य गधों से थोड़े बड़े डीलडौल वाले और ताकतवर होते हैं. एक तरह से ये दुर्लभ गधे भी हैं क्योंकि इनकी संख्या काफी कम रह गई है. कभी ये गधे इस द्वीप पर नमक फैक्ट्री में काम करते थे, हालांकि अब ऐसा नहीं होता.

लेकिन ये गधे पायजामा क्यों पहनते हैं ? इसके पीछे भी कहानी है. दरअसल नमक निकालने के दौरान इन गधों को कई बार दलदल में उतरना पड़ता था. वहाँ इन्हें अक्सर मच्छर और दूसरे कीड़े काट लिया करते थे. इस समस्या से निजात पाने के लिए इनके मालिकों ने इन्हें पायजामे पहनाने शुरू कर दिए.

अब जब नमक का काम बंद हो गया है तब भी इन गधों को पायजामा पहने देखा जा सकता है, क्योंकि अब वह पायजामा इनकी पहचान बन गया है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी. आखिर एक सभ्य और well dressed गधे के ऊपर सवारी करने का आनंद ही कुछ और है !

Images - (Wikimedia1, Wikimedia2)

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चतुर बहू (लोक कथा)

किसी गांव में एक सेठ रहता था. उसका एक ही बेटा था, जो व्यापार के काम से परदेस गया हुआ था. सेठ की बहू एक दिन कुएँ पर पानी भरने गई. 

घड़ा जब भर गया तो उसे उठाकर कुएँ के मुंडेर पर रख दिया और अपना हाथ-मुँह धोने लगी. तभी कहीं से चार राहगीर वहाँ आ पहुँचे. एक राहगीर बोला, “बहन, मैं बहुत प्यासा हूँ. क्या मुझे पानी पिला दोगी?”

सेठ की बहू को पानी पिलाने में थोड़ी झिझक महसूस हुई, क्योंकि वह उस समय कम कपड़े पहने हुए थी. उसके पास लोटा या गिलास भी नहीं था जिससे वह पानी पिला देती. इसी कारण वहाँ उन राहगीरों को पानी पिलाना उसे ठीक नहीं लगा.

बहू ने उससे पूछा, “आप कौन हैं?”

राहगीर ने कहा, “मैं एक यात्री हूँ”

बहू बोली, “यात्री तो संसार में केवल दो ही होते हैं, आप उन दोनों में से कौन हैं? अगर आपने मेरे इस सवाल का सही जवाब दे दिया तो मैं आपको पानी पिला दूंगी. नहीं तो मैं पानी नहीं पिलाऊंगी.”

बेचारा राहगीर उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाया.

तभी दूसरे राहगीर ने पानी पिलाने की विनती की.

बहू ने दूसरे राहगीर से पूछा, “अच्छा तो आप बताइए कि आप कौन हैं?”

दूसरा राहगीर तुरंत बोल उठा, “मैं तो एक गरीब आदमी हूँ.”

सेठ की बहू बोली, “भइया, गरीब तो केवल दो ही होते हैं. आप उनमें से कौन हैं?”

प्रश्न सुनकर दूसरा राहगीर चकरा गया. उसको कोई जवाब नहीं सूझा तो वह चुपचाप हट गया.

तीसरा राहगीर बोला, “बहन, मुझे बहुत प्यास लगी है. ईश्वर के लिए तुम मुझे पानी पिला दो”

बहू ने पूछा, “अब आप कौन हैं?”

तीसरा राहगीर बोला, “बहन, मैं तो एक अनपढ़ गंवार हूँ.”

यह सुनकर बहू बोली, “अरे भई, अनपढ़ गंवार तो इस संसार में बस दो ही होते हैं. आप उनमें से कौन हैं?”

बेचारा तीसरा राहगीर भी कुछ बोल नहीं पाया.

अंत में चौथा राहगीह आगे आया और बोला, “बहन, मेहरबानी करके मुझे पानी पिला दें. प्यासे को पानी पिलाना तो बड़े पुण्य का काम होता है.”

सेठ की बहू बड़ी ही चतुर और होशियार थी, उसने चौथे राहगीर से पूछा, “आप कौन हैं?”

वह राहगीर अपनी खीज छिपाते हुए बोला, “मैं तो..बहन बड़ा ही मूर्ख हूँ.”

बहू ने कहा, “मूर्ख तो संसार में केवल दो ही होते हैं. आप उनमें से कौन हैं?”

वह बेचारा भी उसके प्रश्न का उत्तर नहीं दे सका. चारों पानी पिए बगैर ही वहाँ से जाने लगे तो बहू बोली, “यहाँ से थोड़ी ही दूर पर मेरा घर है. आप लोग कृपया वहीं चलिए. मैं आप लोगों को पानी पिला दूंगी”

चारों राहगीर उसके घर की तरफ चल पड़े. बहू ने इसी बीच पानी का घड़ा उठाया और छोटे रास्ते से अपने घर पहुँच गई. उसने घड़ा रख दिया और अपने कपड़े ठीक तरह से पहन लिए.

इतने में वे चारों राहगीर उसके घर पहुँच गए. बहू ने उन सभी को गुड़ दिया और पानी पिलाया. पानी पीने के बाद वे राहगीर अपनी राह पर चल पड़े.

सेठ उस समय घर में एक तरफ बैठा यह सब देख रहा था. उसे बड़ा दुःख हुआ. वह सोचने लगा, इसका पति तो व्यापार करने के लिए परदेस गया है, और यह उसकी गैर हाजिरी में पराए मर्दों को घर बुलाती है. उनके साध हँसती बोलती है. इसे तो मेरा भी लिहाज नहीं है. यह सब देख अगर मैं चुप रह गया तो आगे से इसकी हिम्मत और बढ़ जाएगी. मेरे सामने इसे किसी से बोलते बतियाते शर्म नहीं आती तो मेरे पीछे न जाने क्या-क्या करती होगी. फिर एक बात यह भी है कि बीमारी कोई अपने आप ठीक नहीं होती. उसके लिए वैद्य के पास जाना पड़ता है. क्यों न इसका फैसला राजा पर ही छोड़ दूं. यही सोचता वह सीधा राजा के पास जा पहुँचा और अपनी परेशानी बताई. सेठ की सारी बातें सुनकर राजा ने उसी वक्त बहू को बुलाने के लिए सिपाही बुलवा भेजे और उनसे कहा, “तुरंत सेठ की बहू को राज सभा में उपस्थित किया जाए.”

राजा के सिपाहियों को अपने घर पर आया देख उस सेठ की पत्नी ने अपनी बहू से पूछा, “क्या बात है बहू रानी? क्या तुम्हारी किसी से कहा-सुनी हो गई थी जो उसकी शिकायत पर राजा ने तुम्हें बुलाने के लिए सिपाही भेज दिए?”

बहू ने सास की चिंता को दूर करते हुए कहा, “नहीं सासू मां, मेरी किसी से कोई कहा-सुनी नहीं हुई है. आप जरा भी फिक्र न करें.”

सास को आश्वस्त कर वह सिपाहियों से बोली, “तुम पहले अपने राजा से यह पूछकर आओ कि उन्होंने मुझे किस रूप में बुलाया है. बहन, बेटी या फिर बहू के रुप में? किस रूप में में उनकी राजसभा में मैं आऊँ?”

बहू की बात सुन सिपाही वापस चले गए. उन्होंने राजा को सारी बातें बताई. राजा ने तुरंत आदेश दिया कि पालकी लेकर जाओ और कहना कि उसे बहू के रूप में बुलाया गया है.

सिपाहियों ने राजा की आज्ञा के अनुसार जाकर सेठ की बहू से कहा, “राजा ने आपको बहू के रूप में आने के ले पालकी भेजी है.”

बहू उसी समय पालकी में बैठकर राज सभा में जा पहुँची.

राजा ने बहू से पूछा, “तुम दूसरे पुरूषों को घर क्यों बुला लाईं, जबकि तुम्हारा पति घर पर नहीं है?”

बहू बोली, “महाराज, मैंने तो केवल कर्तव्य का पालन किया. प्यासे पथिकों को पानी पिलाना कोई अपराध नहीं है. यह हर गृहिणी का कर्तव्य है. जब मैं कुएँ पर पानी भरने गई थी, तब तन पर मेरे कपड़े अजनबियों के सम्मुख उपस्थित होने के अनुरूप नहीं थे. इसी कारण उन राहगीरों को कुएँ पर पानी नहीं पिलाया. उन्हें बड़ी प्यास लगी थी और मैं उन्हें पानी पिलाना चाहती थी. इसीलिए उनसे मैंने मुश्किल प्रश्न पूछे और जब वे उनका उत्तर नहीं दे पाए तो उन्हें घर बुला लाई. घर पहुँचकर ही उन्हें पानी पिलाना उचित था.”

राजा को बहू की बात ठीक लगी. राजा को उन प्रश्नों के बारे में जानने की बड़ी उत्सुकता हुई जो बहू ने चारों राहगीरों से पूछे थे.

राजा ने सेठ की बहू से कहा, “भला मैं भी तो सुनूं कि वे कौन से प्रश्न थे जिनका उत्तर वे लोग नहीं दे पाए?”

बहू ने तब वे सभी प्रश्न दुहरा दिए. बहू के प्रश्न सुन राजा और सभासद चकित रह गए. फिर राजा ने उससे कहा, “तुम खुद ही इन प्रश्नों के उत्तर दो. हम अब तुमसे यह जानना चाहते हैं.”

बहू बोली, “महाराज, मेरी दृष्टि में पहले प्रश्न का उत्तर है कि संसार में सिर्फ दो ही यात्री हैं – सूर्य और चंद्रमा. मेरे दूसरे प्रश्न का उत्तर है कि बहू और गाय इस पृथ्वी पर ऐसे दो प्राणी हैं जो गरीब हैं. अब मैं तीसरे प्रश्न का उत्तर सुनाती हूं. महाराज, हर इंसान के साथ हमेशा अनपढ़ गंवारों की तरह जो हमेशा चलते रहते हैं वे हैं – भोजन और पानी. चौथे आदमी ने कहा था कि वह मूर्ख है, और जब मैंने उससे पूछा कि मूर्ख तो दो ही होते हैं, तुम उनमें से कौन से मूर्ख हो तो वह उत्तर नहीं दे पाया.” इतना कहकर वह चुप हो गई.

राजा ने बड़े आश्चर्य से पूछा, “क्या तुम्हारी नजर में इस संसार में सिर्फ दो ही मूर्ख हैं?”

“हाँ, महाराज, इस घड़ी, इस समय मेरी नजर में सिर्फ दो ही मूर्ख हैं.”

राजा ने कहा, “तुरंत बतलाओ कि वे दो मूर्ख कौन हैं.”

इस पर बहू बोली, “महाराज, मेरी जान बख्श दी जाए तो मैं इसका उत्तर दूं.”

राजा को बड़ी उत्सुकता थी यह जानने की कि वे दो मूर्ख कौन हैं. सो, उसने तुरंत बहू से कह दिया, “तुम निःसंकोच होकर कहो. हम वचन देते हैं तुम्हें कोई सज़ा नहीं दी जाएगी.”

बहू बोली, “महाराज, मेरे सामने इस वक्त बस दो ही मूर्ख हैं.” फिर अपने ससुर की ओर हाथ जोड़कर कहने लगी, “पहले मूर्ख तो मेरे ससुर जी हैं जो पूरी बात जाने बिना ही अपनी बहू की शिकायत राजदरबार में की. अगर इन्हें शक हुआ ही था तो यह पहले मुझसे पूछ तो लेते, मैं खुद ही इन्हें सारी बातें बता देती. इस तरह घर-परिवार की बेइज्जती तो नहीं होती.”

ससुर को अपनी गलती का अहसास हुआ. उसने बहू से माफ़ी मांगी. बहू चुप रही.

राजा ने तब पूछा, “और दूसरा मूर्ख कौन है?”

बहू ने कहा, “दूसरा मूर्ख खुद इस राज्य का राजा है जिसने अपनी बहू की मान-मर्यादा का जरा भी खयाल नहीं किया और सोचे-समझे बिना ही बहू को भरी राजसभा में बुलवा लिया.”

बहू की बात सुनकर राजा पहले तो क्रोध से आग बबूला हो गया, परंतु तभी सारी बातें उसकी समझ में आ गईं. समझ में आने पर राजा ने बहू को उसकी समझदारी और चतुराई की सराहना करते हुए उसे ढेर सारे पुरस्कार देकर सम्मान सहित विदा किया.

5/15/2021

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FSSAI Registration / License क्या होता है ? खाद्य व्यवसाय के लिए ये क्यों जरूरी है ?

FSSAI क्या है ? (What is FSSAI ? )

FSSAI का फुल फॉर्म होता है Food Safety and Standards Authority of India. यह एक सरकारी स्वशासी संस्था है जो भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यह भारत  में खाद्य पदार्थों के व्यवसायों पर निगरानी एवं नियंत्रण हेतु बनाई गई है। 

भारत में कोई भी व्यक्ति, संस्था या कंपनी जो खाद्य पदार्थों के व्यवसाय (Food Business ) में संलग्न है, फिर चाहे वह सड़क किनारे ठेला लगाने वाला चाट - पकौड़ी वाला हो, होटल ढाबा हो या खाद्य पदार्थों के निर्माण या व्यापार में लगा कोई भी व्यक्ति हो, सभी को FSSAI से रजिस्ट्रेशन या license लेना आवश्यक होता है। 

FSSAI संस्था द्वारा FBO (Food Business Operators) को तीन प्रकार के license प्रदान किए जाते है जो कि व्यवसाय के आकार और स्थिति पर निर्भर करते हैं। 

  1. Basic Registration - ये लाइसेन्स छोटे FBO के लिए होता है जिनका वार्षिक टर्नओवर 12 लाख रुपयों से कम होता है। जैसे कि हाथ ठेला वाले, छोटी मिठाई नमकीन आदि की दुकान वाले । 
  2. State License - मध्यम श्रेणी के व्यवसाय इस लाइसेन्स के अंतर्गत आते हैं जिनका टर्नओवर 12 लाख से 20 करोड़ रुपये सालाना तक होता है। 
  3. Central License - इसके अंतर्गत बड़े आकार वाले व्यवसाय आते हैं जिनका वार्षिक टर्न ओवर 20 करोड़ रुपये सालाना से अधिक होता है तथा कारोबार एक से अधिक राज्यों में फैला हुआ होता है। 

FSSAI लाइसेन्स या रजिस्ट्रेशन कैसे प्राप्त करें ? (How to obtain FSSAI License / Registration ?)

FSSAI से लाइसेन्स प्राप्त करना बहुत कठिन काम नहीं है। इसके लिए आपको license की श्रेणी के अनुसार अपने जिले की FSSAI ऑफिस में निर्धारित फॉर्म में आवेदन करना होता है। आपके द्वारा कागजातों की जांच के बाद कुछ दिनों के भीतर लाइसेन्स प्रदान कर दिया जाता है जो सामान्यतः 1 वर्ष के लिए होता है। इसे बाद में renew कराया जा सकता है। 

आजकल आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन भी होती है। इसके लिए आप FSSAI की वैबसाइट  https://foscos.fssai.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस वैबसाइट पर आवेदन में लगने वाले दस्तावेज़ और फीस का विवरण भी दिया गया है जिसे आप डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं। 

5/14/2021

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ये 10 Hindi jokes पढ़ लो, मुस्कान रोक नहीं पाओगे

आजकल ज़िन्दगी में हर तरफ टेंशन ही टेंशन है ऐसे में चुटकुले या जोक्स (jokes) राहत की गोली का काम करते हैं जो कैसी भी परिस्थिति हो, होंठों पर तुरंत मुस्कान लाने का माद्दा रखते हैं. तो फिर देर किस बात की, आइये पढ़ लेते हैं कुछ मजेदार चुटकुले –

Joke #1

पति ने पत्नी से कहा पिछले महीने का हिसाब दो.

पत्नी ने हिसाब लिखना शुरू किया और बीच बीच में लिखने लगी भ. जा. कि. गे .

800 भ. जा. कि. गे.

2000 भ. जा. कि. गे.

500 भ. जा. कि. गे.

पति ने पूछा – “ये भ. जा.कि. गे की क्या है ?”

पत्नी – “भगवान जाने किधर गए…”

Joke #2 

गोलू – “सर, तम्बाकू को अंग्रेजी में क्या कहते हैं ?”

टीचर – “उसे tobacco कहते हैं पर तू क्यों पूछ रहा है …?”

गोलू – “वो इसलिए सर … मान लो अगर कभी अमेरिका जाना पड़ा तो वहाँ किसी से मांगने में परेशानी न हो !!”

*मास्टरजी ने वहीं से चप्पल फेंक कर मारी*

Joke #3 

राजू (दुकानदार से) – एक सफोला ऑयल देना

दुकानदार- लो …

राजू – इसके साथ फ्री गिफ्ट नहीं दिया

दुकानदार- इसके साथ कुछ फ्री नहीं है

राजू – मगर इसमें तो लिखा है cholestrol Free … !!!

Joke #4 

लड़की: मेरे पापा ने कहा है कि अगर मैं एग्जाम में फेल हो गई तो मेरी शादी रिक्शावाले से करा देंगे।

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पप्पू: अरे वाह! मेरे पापा ने कहा है कि अगर मैं फेल हुआ तो मुझे रिक्शा खरीद देंगे।

Joke #5

शादीशुदा लोगों का पेट बढ़ने का कारण…

पहले बाहर दोस्तों के साथ पार्टी करो और फिर…

घर आकर बीवी के डर से दोबारा खाना खाओ।

Joke #6

एक सत्संग के दौरान :

संत प्रवचन करते हुए - "जो इस जन्म में नर है वो अगले जन्म में भी नर ही होगा और जो इस जन्म में नारी है वो अगले जन्म में भी नारी होगी ...." , 

इतने में एक बुढ़िया उठ कर जाने लगी ….

संत : कहाँ जा रही हो ऐसे उठ कर ?

बुढ़िया : जब अगले जन्म में भी रोटियाँ ही बनानी है तो सत्संग सुन कर क्या फायदा

Joke #7

पुलिस वाला – पार्क में क्यों बैठे हो ?

आदमी – हम दोनों शादी शुदा हैं …

पुलिस – तो घर में बैठो न …

आदमी – इसका पति नहीं मानेगा … !

Joke #8

एक आदमी ने iPhone बेचकर पिस्तौल खरीद ली.

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अब तक उस पिस्तौल की दम पर उसके पास 10 iPhone हो चुके हैं.

Joke #9

एक गाँव में बाढ़ आ गई. पीड़ितों को बचाने के लिए सेना का हेलिकॉप्टर आया.

उसी गाँव के सरपंच से एक मीडियाकर्मी ने पूछा – “आपके गाँव की जनसँख्या सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक़ मात्र पांच सौ है लेकिन सेना का हेलिकॉप्टर अब तक लगभग तेरह सौ लोगों को बाहर निकाल चुका है. ये कैसी गडबड है ?”

सरपंच – “सरकारी रिकॉर्ड बिलकुल सही है साहब, यहाँ पांच सौ लोग ही रहते हैं. असली बात ये है कि हमारे गाँव में पहली बार हेलिकॉप्टर आया है ना  इसलिए आर्मी वाले इधर उन्हें निकाल कर  किनारे पर लाते हैं  उधर वे फिर से हेलिकॉप्टर में चढ़ने के लिए वापस पानी में कूद जाते हैं …. !!!”

Joke #10

पोल्ट्री फार्म इंस्पेक्टर ने एक बार शहर के सभी पोल्ट्री फार्म मालिकों को बुलाया.

इंस्पेक्टर ने पहले मालिक से पूछा –

इंस्पेक्टर – “तुम मुर्गियों को क्या खिलाते हो ?”

पहला मालिक – “बाजरा”.

इंस्पेक्टर – “खराब खाना ! …. इसे गिरफ्तार कर लो”.

अब दूसरे मालिक की बारी आई.

इंस्पेक्टर – “मुर्गियों को क्या खिलाते  हो ?”

दूसरा मालिक – “चावल सर !”

इंस्पेक्टर – “गलत खाना ! इसे भी गिरफ्तार कर लो”.

अब छगन की बारी आई. अब तक वह बहुत ही डर गया था.

इंस्पेक्टर – “तुम बताओ, तुम क्या खिलाते हो ?”

छगन – “मैं तो जी मुर्गियों को रोज  10-10 रुपये दे देता हूँ और बोल देता हूँ कि जो  मर्जी हो बाजार में जाकर खा लो  …. !!!”

5/13/2021

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आपकी आईडी पर कोई और तो नहीं चला रहा सिमकार्ड, ऐसे करें पता

आज के डिजिटल युग में धोखाधड़ी और ठगी भी हाइटेक हो गई है। किसी और के पहचान पत्र के आधार पर सिमकार्ड जारी करा कर उपयोग करना भी इसी तरह की एक धोखाधड़ी है जिसका पता आसानी से नहीं चल पाता है। लेकिन अब इस तरह के मामलों पर रोक लगने वाली है। 

यदि आप पता करना चाहते हैं कि आपके पहचान पत्र के आधार पर कोई और मोबाइल नंबर तो नहीं चल रहा है तो अब इसके लिए आपको मोबाइल कंपनियों और पुलिस के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। अब घर बैठे ही आप इसका पता लगा सकते हैं। 

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने  एक पोर्टल (TAF COP Consumer Portal) लॉंच किया है जो उपभोक्ताओं को उनके नाम पर जारी किए मोबाइल नंबरों की जानकारी देगा। इस पोर्टल का पता है - https://www.tafcop.dgtelecom.gov.in ॰ 

इस पोर्टल पर आप अपना मोबाइल नंबर डाल कर और उसे ओटीपी द्वारा वेरीफाय करके अपने नाम से जारी सभी मोबाइल नंबरों की सूची देख सकते हैं। 

यदि कोई नंबर ऐसा पाया जाता है जो आपका नहीं है या आपकी जानकारी में नहीं है तो उसे बंद कराने या उचित कार्यवाही करने के लिए request भी उक्त पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है। 

(हो सकता है अभी आप अपना नंबर डालकर चेक करें और आपको कोई परिणाम न मिले, क्योंकि अभी सभी उपभोक्ताओं का डाटा पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हो पाया है। लेकिन निकट भविष्य में यह सुविधा सभी देशवासियों को मिलेगी, ऐसी उम्मीद है। )

5/11/2021

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10 मजेदार हिन्दी चुटकुले

 10 मजेदार हिन्दी चुटकुले | 10 Majedar Hindi Jokes / Chutkule

चुटकुला #1 

रमेश - डॉक्टर साहब, मुझे एक समस्या है ... 

डॉक्टर - क्या ? 

रमेश - जब मैं किसी से बात करता हूँ तो मुझे आदमी की सिर्फ आवाज़ सुनाई देती है वो दिखाई नहीं देता !!

डॉक्टर - और ऐसा कब होता है ?

रमेश - फोन पर बात करते वक़्त .... 

*डॉक्टर आगबबूला*

चुटकुला #2

पत्नी सुबह-सुबह बिस्तर से उठी और मेकअप करने लगी। तभी पति की भी आँख खुल गई। 

पति - पगला गई हो क्या ? इतनी सुबह-सुबह कौन मेकअप करता है भला ? 

पत्नी - तुम चुपचाप लेटे रहो ... मुझे अपना फोन खोलना है ! कल रात को फेस लॉक लगा दिया था और अब वह मुझे पहचान नहीं रहा है ... 

चुटकुला #3 

पप्पू : आज मैंने अपनी इज्जत बचा ली

गुड्डू : कैसे?

पप्पू : सड़क पर आती हुई एक लड़की को इग्नोर करके

गुड्डू : इग्नोर करने से इज्जत कैसे बची?

पप्पू : इग्नोर नहीं करता तो वह मुझे इग्नोर कर देती, इज्जत बच गई !!

चुटकुला #4

प्रेमी – जल्दी से शादी कर लेते हैं।

प्रेमिका – पहले अपने हालात तो ठीक हो जाएं।

प्रेमी – तुम क्यों फिक्र करती हो । शादी से कोई असर नहीं पड़ेगा। तुम अपनी नौकरी जारी रखना, मैं अपनी नौकरी की तलाश जारी रखूंगा …… !!!

चुटकुला #5

एक बस में –

रामवती (Conductor से ) – भाई, रामपुर आ गया ?
Conductor – नहीं, अभी नहीं आया.

थोड़ी देर बाद –
रामवती – भाई, रामपुर आ गया ?
Conductor – नहीं आया.

फिर थोड़ी देर बाद –
रामवती – भाई, रामपुर …… ?
Conductor – आराम से बैठिये, आयेगा तो मैं खुद बता दूंगा.

(बहुत समय के बाद अचानक Conductor को ध्यान आया कि रामपुर तो २ स्टॉप पीछे निकल गया.) उसने फ़ौरन बस को वापिस मोड़ा और रामपुर जाकर रामवती से कहा – माई, रामपुर आ गया.

रामवती ने अपने झोले से एक दवाई की पुडिया निकली और खाकर आराम से बैठ गयी. उसने Conductor को बताया – मेरे बेटे ने कहा था कि जब रामपुर आ जाये तो दवाई खा लेना….. !!!

चुटकुला #6

दादा-दादी बन चुके एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने जवानी के दिनों को याद करने का फैसला किया.

अगले दिन दादाजी हाथ में गुलाब का फूल लेकर उसी रास्ते पर जाकर खड़े हो गए जहां से जवानी के दिनों में दादी जी गुजरा करती थीं.

दादाजी काफी देर तक खड़े रहे, यहाँ तक कि उन के पैरों में दर्द होने लगा, मगर दादी जी नहीं आईं.

घर जाकर दादाजी गुस्से से दादी जी से बोले – “तुम आईं क्यों नहीं ?”

दादी जी शर्माते हुए बोलीं – “मम्मी ने आने ही नहीं दिया … !!!”

चुटकुला #7

एक आदमी public toilet में गया और चूंकि उस दिन उसका पेट कुछ ज्यादा ही खराब था सो एक घंटे बाद निकला …

जमादार बोला – “20 रुपये दो !”

आदमी- “क्या ??? अबे toilet में बैठा था cyber cafe में नहीं !!!”

चुटकुला #8

एक लड़की ने नए नए बने अपने बॉयफ्रेंड को फोन किया. गलती से फोन किसी अन्य लड़के को लग गया.
लड़की: हेल्लो डार्लिंग !

लड़का: ओह  जानू कैसी हो?

लड़की: अभी क्या कर रहे हो?

लड़का: तुम्हारी तस्वीर देख रहा हूँ …. कहीं और दिल ही नहीं लग रहा आज कल.

लड़की: पर मैंने तो तुम्हे कोई अपनी तस्वीर दी ही नहीं ?

लड़का: अरे मेरे दिल में छपी है बरसों से !

लड़की: पर हम तो परसों ही मिले हैं?

लड़का: तुम्हारे बिना हर एक पल बरसों की तरह है पिंकी … !

लड़की: पिंकी? ये पिंकी कौन है मैं तो निशा हूँ !

लड़का: तुमसे बात करके मैं सब भूल जाता हूँ …

लड़की: तुम अजय बोल रहे हो ना?

लड़का: घर वाले समीर बुलाते हैं लेकिन वो गलत हो सकते हैं तुम नहीं !

लड़की: यह 98265XXXXX है ना?

लड़का: अब तक नहीं था पर अब से यही है !!!

चुटकुला #9

अजीत एक बार भारत-पाक  क्रिकेट मैच देख रहे थे. पाकिस्तान को जीतने के लिए 3 गेंदों में 18 रनों की जरूरत थी.

कपिल देव बॉलिंग कर रहे थे और इमरान खान बैटिंग.

अजीत – “रॉबर्ट, कपिल से जाकर कहो कि एक बाउंसर डाल दे और इमरान को आउट कर दे …”

रॉबर्ट – “ओके बॉस …”.

रॉबर्ट कपिल के पास गया और अजीत का सन्देश सुनाया. कपिल ने सिर हिलाया और अगली गेंद बाउंसर डाली. पर इमरान ने उस पर छक्का जड़ दिया.

अजीत – “रॉबर्ट, अब कपिल से कहो कि एक खतरनाक योर्कर डाले और इसे आउट करे …”

रॉबर्ट फिर कपिल के पास गया और कपिल ने योर्कर गेंद फेंकी. लेकिन इमरान ने फिर छक्का जड़ दिया.

अब केवल 1 गेंद बची थी और 6 रन चाहिए थे.

रॉबर्ट – “बॉस, अब कपिल से जाकर क्या कहना है ?”

अजीत – “अब कपिल से कुछ मत कहना … अब इमरान से जाकर कहो कि उसकी माँ और बीवी हमारे कब्जे में है … !”

चुटकुला #10

एक बिजनेसमैन ने फाइव स्टार होटल में अपने ग्राहकों के लिए आलीशान पार्टी रखी..

सबको एक हॉल में बिठाया गया

तभी एक घोषणा हुई …

2 रुपये में अनलिमिटेड ब्रेकफास्ट ☕….

सब लोग खा कर आराम से बैठ गए…

वहां दूसरी घोषणा हुई 

1 रुपये में अनलिमिटेड लंच ….

सब लोगों के साथ और लोग भी वहां पहुंचे पूरा हॉल एकदम फुल

सब लोगों ने भरपेट खाया

शाम को….

वहां तीसरी घोषणा हुई

50 पैसे में अनलिमिटेड डिनर ….

सब लोगो ने एक साथ भर पेट खाना खाया…

तभी फिरसे घोषणा हुई..

25 पैसे में अनलिमिटेड स्वीट डिश

बस फिर तो लोग टूट जैसे ही पड़े

अभी वो खा ही रहे थे …..

तभी एक और घोषणा हुई

हाजमोला की गोली 500 रुपये में …

अभी लोगों ने गोलियाँ खरीदी ही थी

तभी एक और जबरदस्त घोषणा हुई …

Toilet जाने के 1000 रूपये… !!!

और पढ़ें .... 

5/09/2021

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‘टेडी बियर’ के अस्तित्व में आने की कहानी, इसके पीछे है एक रोचक किस्सा

 ‘टेडी बियर’ वह प्यारा खिलौना है जो बच्चों को तो बहुत पसंद होता ही है बड़ों को भी खूब भाता है. हर उस घर में जिसमें बच्चे होते हैं, छोटा या बड़ा एक टेडी बियर तो होता ही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘टेडी बियर’ को टेडी बियर क्यों कहते हैं? इसका यह नाम कैसे पड़ा और यह खिलौना कब और कैसे अस्तित्व में आया ? इसके पीछे भी एक रोचक किस्सा है जिसका सम्बन्ध एक पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति से है.

अमरीका के 26वें राष्ट्रपति थे थियोडोर ‘टेडी’ रुजवेल्ट, जो एक बार सन 1902 में मिसिसिपी राज्य के गवर्नर के न्यौते पर जंगल में भालू का शिकार करने गए. राष्ट्रपति के अमले में लोगों के अलावा कई शिकारी कुत्ते और घोड़े शामिल थे.

जंगल में तम्बू लगा दिए गए और भालू की तलाश शुरू हुई.  पूरे दिन ढूंढ़ते रहे पर एक भी भालू कहीं नहीं दिखा. दूसरे दिन फिर तलाश शुरू हुई लेकिन फिर भी जंगल में एक भी भालू नजर नहीं आया. राष्ट्रपति रूजवेल्ट और उनके साथ के दूसरे आला अफसर मायूस हो चले थे.

राष्ट्रपति की टीम के कुछ सदस्यों को यह अच्छा नहीं लगा और उन्होंने सोचा कि यदि राष्ट्रपति इस तरह बिना शिकार किये यहाँ से चले गए तो उनकी बहुत बदनामी होगी. यही सोचकर कुछ सदस्य फिर से जंगल में गए और कहीं से एक बूढ़े से भालू को पकड़ लाये और पेड़ से बाँध दिया.

राष्ट्रपति से कहा गया कि वे इस पर गोली चला कर अपना शिकार का शौक पूरा कर सकते हैं. परन्तु रूजवेल्ट को उस भालू पर दया आ गई और उन्होंने उस पर गोली चलाने से इनकार कर दिया. पेड़ से बंधे भालू को देखकर वे बोले, “मैं शिकार के लिए लगभग पूरे अमेरिका में घूमा हूं. मुझे गर्व है कि मैं एक शिकारी हूं, लेकिन एक बूढे हो चुके असहाय भालू को मारकर मुझे गर्व की अनुभूति नहीं होगी, वह भी तब जब यह पेड़ से बंधा हुआ हो”.

राष्ट्रपति की शिकार करने वाली टीम में कुछ पत्रकार भी शामिल थे सो अगले ही दिन यह घटना अमेरिका के अखबारों की हैडलाइन बन गई. जानेमाने अमेरिकी अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने तो इसके ऊपर एक कार्टून ही बनाकर छाप दिया.

Wikipedia

ये कार्टून मॉरिस मिकटॉम नाम के एक रूसी यहूदी ने देखा जो ब्रुकलिन में दिन में टॉफियां बेचते थे और रात में अपनी पत्नी के साथ मिल कर सॉफ्ट टॉय बनाते थे. मिकटॉम ने एक कपड़े से भालू का बच्चे का खिलौना बनाया और अपनी दुकान पर रखा और नीचे नाम लिखा ‘टेडी बीयर’.


मिकटॉम ने  ऐसा ही एक खिलौना बना कर राष्ट्रपति रूजवेल्ट को भी भेजा जो उन्हें बहुत पसंद आया और उन्होंने तुरंत इसके लिए अपना नाम इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी.

टेडी बियर कुछ ही समय में पूरे अमेरिका में लोकप्रिय हो गया और मिकटॉम टॉफियां बेचना बंद कर के पूरी तरह से टेडी बियर के धंधे में उतर गए. 1904  में रूजवेल्ट ने इसे रिपब्लिकन पार्टी के चिन्ह के रूप में भी अपनाने की इजाजत दे दी.

आज टेडी बियर पूरी दुनिया में फ़ैल चुका है और बच्चों की पहली पसंद बन गया है.

और पढ़ें ... 

5/08/2021

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दुनिया की सबसे छोटी फ्लाइट जो महज 2.7 किमी की दूरी तय करती है

हवाई यात्रा की बात हो तो इसका मतलब यही समझा जाता है कि यात्रा अवश्य ही लम्बी होगी. लेकिन दुनिया में एक हवाई रूट इतना छोटा है कि इससे ज्यादा लम्बा तो आप सुबह – सुबह वाक करके आते होंगे. जी हाँ, दुनिया में एक फ्लाइट है जो महज डेढ़ मिनट में पूरी हो जाती है.

इस वीडियो में जानिये कहाँ चलती है फ्लाइट –